दिल में है एक दर्द तीखा सा जो किसी को दिखता नहीं सिर्फ़ मुझे होता है महसूस फिर किसी को क्या कहूँ कैसे बताऊँ कि साँस लेना आसान नहीं और कभी चलना भी है मुश्किल कैसे समझाऊँ उन्हें जिनको कुछ दिखता ही नहीं वो बस मुझ पर हंसते चले जाते हैं तो मैंने भी उनके साथ साथ अपने पे हँसना सीख लिया है हाँ इसीलिए मुस्कुरा रहा हूँ सोचा शायद मुस्कुराने की आदत पड़ जाए और दिल का यह तीखा दर्द बस मुझे महसूस ही ना हो पर इस सवाल का जवाब नहीं मिला मुझे कि अगर यह महसूस नहीं होगा तो क्या यह दर्द नहीं रहेगा