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Poetry


तेरे बिन
मिला न तू जब तक मुझे, जिया बस जिये बिन जीना किसको कहते हैं, वो जाना है अब मैने मिला तू तो मै समझा, साँस लेना जीना नही अब हर साँस आती है, ओर मुझे ये समझाती है कि जीना कितना मुशकिल है, तेरे बिन - तेरे बिन तेरी यादों के साये में, अक्सर मैं खो जाता हूँ मुस्कानों की भीड़ में भी, हरदम रो जाता हूँ कितनी अधूरी लगती है, हर ख़ुशी - हर गिन कि जीना कितना मुश्किल है, तेरे बिन – तेरे बिन हर शाम ढलती है यूँ, जैसे कोई सज़ा हो हर रात कहती है मुझसे, तू ही मेरी दवा हो बंद आँखों में भी अब, त

Zyphyr
Dec 1, 20211 min read


एक सवाल
दिल में है एक दर्द तीखा सा जो किसी को दिखता नहीं सिर्फ़ मुझे होता है महसूस फिर किसी को क्या कहूँ कैसे बताऊँ कि साँस लेना आसान नहीं और कभी चलना भी है मुश्किल कैसे समझाऊँ उन्हें जिनको कुछ दिखता ही नहीं वो बस मुझ पर हंसते चले जाते हैं तो मैंने भी उनके साथ साथ अपने पे हँसना सीख लिया है हाँ इसीलिए मुस्कुरा रहा हूँ सोचा शायद मुस्कुराने की आदत पड़ जाए और दिल का यह तीखा दर्द बस मुझे महसूस ही ना हो पर इस सवाल का जवाब नहीं मिला मुझे कि अगर यह महसूस नहीं होगा तो क्या यह दर्द नहीं रहेगा

Zyphyr
Aug 1, 20211 min read


The Road
I woke one day and felt something— a pulse, uncertain, yet alive. Life stood before me — not as promise, but a road unfolding in morning light Feeling upbeat, set out on trip, started walking the winding road, I walked on — no map, no sign, just a small flame burning inside. The road was kind, the road was cruel, wandering wild, breaking each rule. It cut my feet, yet lit the sky — each fall taught me how to rise. And I walked on, I walked on — the road is, where I belong. Th

Zyphyr
May 29, 20212 min read
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